हर बड़ी पहल की अपनी शुरुआत की कहानी होती है। साइबर गोल्ड क्वेस्ट किसी दृष्टि-पत्र या सुव्यवस्थित रणनीति से नहीं, दो जिज्ञासु युवाओं के एक सरल प्रयास से शुरू हुआ।
2023 के मध्य में Ajay Dewari और Lalit Kandpal को IndiaSkills Cyber Security प्रतियोगिता के बारे में पता चला। दोनों की साइबर सुरक्षा पृष्ठभूमि नहीं थी। Linux, नेटवर्किंग, रिवर्स इंजीनियरिंग, फॉरेंसिक्स, क्रिप्टोग्राफी, वेब सुरक्षा और CTF उनके लिए लगभग नए थे। फिर भी उन्होंने प्रयास करने का निर्णय लिया।
अनिश्चित शुरुआत
पहले महीनों में हर विषय पाँच और अनजान विषयों का द्वार खोलता था। कुछ शामें कठिन चुनौती हल करने की खुशी देतीं; कई शामें उत्तर से अधिक प्रश्न छोड़तीं। आसपास न कोई पिछला पदक विजेता था, न स्थानीय साइबर प्रतियोगिता समुदाय या प्रशिक्षण व्यवस्था।
किसी कठिन समस्या पर पर्याप्त समय तक काम करने से धीरे-धीरे बदलाव आता है। जो पहले असंभव लगता था, वह समझ में आने लगता है। यही अनुभव बाद में मिशन के मूल विचारों में से एक बना।
किसी कठिन समस्या पर लगातार काम करते रहने से असंभव दिखने वाली बात भी धीरे-धीरे समझ में आने लगती है।
पहला प्रतियोगिता चक्र
2024 की राज्य-स्तरीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड को स्वर्ण पदक मिला। राष्ट्रीय मंच ने उपलब्धि के साथ कमियाँ भी स्पष्ट कीं—मजबूत नींव, व्यापक अभ्यास और बेहतर मार्गदर्शन की आवश्यकता।
कठिन राष्ट्रीय अनुभव विफलता का अंतिम निर्णय नहीं बना। उसने अगले तैयारी चक्र को दिशा दी। मार्च 2026 में उत्तर क्षेत्र स्वर्ण और अप्रैल 2026 में राष्ट्रीय कांस्य उसी निरंतरता के पड़ाव बने।
पदकों से आगे का मिशन
पदक ने यह प्रमाण दिया कि उत्तराखंड से साइबर प्रतिभा राष्ट्रीय मंच तक पहुँच सकती है। लेकिन यदि कहानी दो विद्यार्थियों पर रुक जाए तो उसका व्यापक मूल्य सीमित रहेगा।
साइबर गोल्ड क्वेस्ट का उद्देश्य अधिक विद्यार्थियों को शुरुआती परिचय, नियमित अभ्यास, CTF, सिस्टम की मजबूत बुनियाद, प्रतियोगिता और मार्गदर्शन की स्पष्ट यात्रा देना है। चैंपियन सामने दिखने वाला लक्ष्य है; व्यापक क्षमता स्थायी परिणाम है।
विद्यार्थी का मार्ग
विद्यार्थी की यात्रा स्कूल सेमिनार से शुरू होकर InCTF Junior जैसे CTF तक पहुँच सकती है और फिर क्लब, लैब, Linux, नेटवर्किंग, Python, C/C++, वेब सुरक्षा, फॉरेंसिक्स व क्रिप्टोग्राफी की गहन तैयारी में आगे बढ़ सकती है।
प्रतिबद्ध विद्यार्थी IndiaSkills, WorldSkills और उन्नत अध्ययन की तैयारी कर सकते हैं। प्रतियोगिता हर विद्यार्थी का लक्ष्य नहीं, लेकिन उसका मानक नियमित सीख को दिशा दे सकता है।
सुलभता और टिकाऊपन
पहला परिचय अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ होना चाहिए। जागरूकता सेमिनार, शुरुआती CTF सत्र और सार्वजनिक संसाधन उन्हें बिना किसी बिक्री के दबाव के इस क्षेत्र को समझने देते हैं।
नियमित प्रशिक्षण, समर्पित मार्गदर्शन, विशेष स्कूल कार्यक्रम और लैब कार्यान्वयन के लिए संसाधन चाहिए, इसलिए वे सशुल्क हो सकते हैं। योग्यता और वास्तविक वित्तीय आवश्यकता वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सीमित छात्रवृत्तियों की व्यवस्था भी जरूरी है।
क्षेत्रीय और राष्ट्रीय क्षमता
साइबर सुरक्षा डिजिटल अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक प्रणाली और महत्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा करती है। उत्तराखंड के विद्यार्थी इस क्षेत्र में करियर के साथ भारत की रणनीतिक क्षमता में योगदान दे सकते हैं।
साइबर गोल्ड क्वेस्ट केवल प्रतियोगिता कार्यक्रम नहीं, एक बड़ा प्रश्न भी है: क्या एक स्पष्ट लक्ष्य पूरे क्षेत्र को प्रतिभा पहचानने, कठिन अभ्यास व्यवस्थित करने और हर नए समूह के लिए बेहतर तैयारी का रास्ता बनाने में मदद कर सकता है? अब तक की यात्रा ने दिखाया है कि इसकी शुरुआत संभव है।